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ग्रामीणों ने 27 बोरा चावल पिकअप सहित पुलिस को सौंपा

प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों अनाज की कालाबाजारी चरम सीमा पर पहुंच गई है। कालाबजारी करने वाले लोगों को पुलिस समेत प्रशासन का डर नहीं रह गया है। ऐसे महामारी में लोग ब्लैक मनी जमा करने में लगे हैं। पीडीएस दुकानदार एवं अवैध चावल का कारोबार करने वाले लोग पुलिस-प्रशासन के आखों में धुल झोककर कालाबजारी कर रहें है। क्षेत्र में अभी लॉकडाउन की वजह से लोगों को खाने के लाले पड़े हैं। वहीं कारोबारी अवैध कारोबार करने से बाज नही आ रहें है। रविवार को प्रखंड क्षेत्र के महकार गांव में कालाबाजारी करते एक पिकअप वाहन पर कालाबाजारी करने जा रहे 27 बोरा पीडीएस के चावल को वहां के ग्रामीणों ने देखा और इसका विरोध किया।

ग्रामीणों द्वारा विरोध करने पर वहां से कालाबजारी करने वाले लोग फरार हो गए। ग्रामीणों ने इस बात की सूचना रजौली के अनुमंडल पदाधिकरी चन्द्रशेखर आजाद और बीडीओ को दी। अनुमंडल पदाधिकारी ने रोह थाना को चावल लदे पिकअप को जब्त करने को कहा। रोह थाना के पुलिस ने महकार गांव जाकर पिकअप वाहन पर लदे कालाबाजारी के चावल के 27 बोरो को जब्त किया। ग्रामीणों का कहना है की चावल महकार गांव के एक डीलर के घर के पास से निकला जा रहा था। चावल लेने वाला कारोबारी मनोज प्रसाद बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महकार गांव में दो जनवितरण प्रणाली दुकानदार है रंजीत पासवान और यमुना यादव दोनों के कार्यशैली लाभुकों के साथ ठीक नहीं है।



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Villagers handed over 27 bags of rice including pickup to police


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पड़ोसी राज्यों से पहले वीआईपी ट्रीटमेंट फिर शुरू; विधायकों की गाड़ियों पर लगेगी झंडी

लाल बत्ती हटने के बाद वीआईपी कल्चर से बाहर हुए विधायकों की गाड़ी की अब दूर से पहचान हो सकेगी। जल्द मंत्रियों की तरह अब इन गाड़ियों पर भी झंडी लगेगी। अभी गाड़ी में कौन बैठा है, इसकी जानकारी विधायक की ओर से न दिए जाने तक न तो किसी कर्मचारी-अधिकारी को होती है और न ही आम आदमी को। इसलिए अब एमएलए लिखी झंडी गाड़ी पर लगेगी तो माननीयों को कुछ वीआईपी ट्रीटमेंट शुरुआत में ही मिलने लग जाएगा। इन झंडियों का डिजाइन तैयार हो चुका है। इसे स्पीकर ने मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि मॉनसून सत्र से पहले विधायकों की गाड़ियों पर ये झंडियां लग जाएंगी। विधायकों को हालांकि अभी विधानसभा से एमएलए लिखा स्टीकर जारी किया है, जो गाड़ियों के शीशे पर लगा है। पुलिस कर्मचारी हो या अन्य कोई, इस पर जल्दी नजर नहीं जाती। इसलिए कई उन्हें पार्किंग से लेकर रास्ते तक में रोक लिया जाता है। इससे कई बार विधायकों व पुलिस की बहस होने की खबरें भी आती रहती हैं। विधायकों ने पहचान के लिए झंडी की मांग थी। इसके अलावा गाड़ी की मांग भी की जाती रही है, जिसके लिए सरकार इनकार कर चुकी है। पुलिस अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों आगे...