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काेराेना मरीजों के परिजन किसी भी श्मशान भूमि या कब्रिस्तान में करा सकेंगे अंतिम संस्कार

चंदपुरा गांव में 80 वर्षीय महिला के अंतिम संस्कार को लेकर जहां ग्रामीणों ने पथराव किया, वहीं पुलिस को इन हालात पर काबू पाने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी। जबकि प्रशासन ने जिले के सभी खंडों में अंत्येष्टि के लिए स्थान पहले से निर्धारित किए हुए थे।

हालांकि, मंगलवार को शहरी एवं स्थानीय निकाय विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने जो पत्र जारी किया है उससे अब कोरोना मरीज के परिजन सिविल सर्जन को प्रार्थना कर चिन्हित किए स्थानों के अतिरिक्त अपनी मर्जी की श्मशान भूमि व कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार करा सकेंगे। जिसके बाद सिविल सर्जन तुरंत स्थानीय निकाय के नोडल अधिकारी को सूचित करेंगे। हालांकि, अस्थियां म्यूनिसिपैलिटी की नामिक टीम के द्वारा साइंटिफिक ढंग से ही एकत्र की जाएंगी। इस कार्य में जुड़े सभी लोगों को पर्याप्त पीपीई किट, फेस मास्क, ग्लब्स आदि उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।



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आरोपी चंदपुरा की महिलाओं को कोर्ट ले जाती पुलिस।


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पड़ोसी राज्यों से पहले वीआईपी ट्रीटमेंट फिर शुरू; विधायकों की गाड़ियों पर लगेगी झंडी

लाल बत्ती हटने के बाद वीआईपी कल्चर से बाहर हुए विधायकों की गाड़ी की अब दूर से पहचान हो सकेगी। जल्द मंत्रियों की तरह अब इन गाड़ियों पर भी झंडी लगेगी। अभी गाड़ी में कौन बैठा है, इसकी जानकारी विधायक की ओर से न दिए जाने तक न तो किसी कर्मचारी-अधिकारी को होती है और न ही आम आदमी को। इसलिए अब एमएलए लिखी झंडी गाड़ी पर लगेगी तो माननीयों को कुछ वीआईपी ट्रीटमेंट शुरुआत में ही मिलने लग जाएगा। इन झंडियों का डिजाइन तैयार हो चुका है। इसे स्पीकर ने मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि मॉनसून सत्र से पहले विधायकों की गाड़ियों पर ये झंडियां लग जाएंगी। विधायकों को हालांकि अभी विधानसभा से एमएलए लिखा स्टीकर जारी किया है, जो गाड़ियों के शीशे पर लगा है। पुलिस कर्मचारी हो या अन्य कोई, इस पर जल्दी नजर नहीं जाती। इसलिए कई उन्हें पार्किंग से लेकर रास्ते तक में रोक लिया जाता है। इससे कई बार विधायकों व पुलिस की बहस होने की खबरें भी आती रहती हैं। विधायकों ने पहचान के लिए झंडी की मांग थी। इसके अलावा गाड़ी की मांग भी की जाती रही है, जिसके लिए सरकार इनकार कर चुकी है। पुलिस अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों आगे...