नगर पालिका के प्रधान और सेक्रेटरी के बीच चल रही तनातनी में अपनी सैलरी से हाथ धोने वाले कर्मचारियों ने अब सैलरी के लिए प्रशासन का सहयोग न मिलने पर लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कर्मचारियों की ओर से शुक्रवार को इस संबंध में याचिका दायर की गई है। बताया गया कि नगर पालिका में आउटसोर्सिंग के तहत तीन कंप्यूटर ऑपरेटर, 1 पियून और एक लाइट इंस्पेक्टर की तैनाती की गई थी। बाद में एक अन्य कंप्यूटर ऑपरेटर की भी तैनाती कर दी गई।
इस तरह अब कुल 6 कर्मचारियों की सैलरी बीते मार्च माह से अटकी हुई है। कंप्यूटर ऑपरेटर प्रवीण कुमार ने बताया कि नगर पालिका प्रधान और नगर पालिका सेक्रेटरी में चल रही तनातनी के चलते उनकी सैलरी अब तक नहीं मिली है जबकि वह डीसी ऑफिस में भी गुहार लगा चुके हैं। डीसी की पीए ने कर्मचारियों को बुलाकर भरोसा दिया था कि उनके मामले का समाधान कर दिया गया है। उन्हें सैलरी मिल जाएगी लेकिन लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी अब तक सैलरी जारी नहीं हुई है।
ये है विवाद की पूरी वजह
बता दें कि इस पूरे विवाद की वजह चेयरमैन कविता नंदवानी के प्रतिनिधि उमेश नंदवानी की बात लाइट इंस्पेक्टर द्वारा नहीं मानने को लेकर हैै। उमेेेश नंदवानी ने लाइट इंस्पेक्टर संजीव वर्मा को कहा था कि सिविल अस्पताल केेेे पीछे लाइटें लगवाई जाए जो जनता की जरूरत है लेकिन लाइट इंस्पेक्टर नेे लिख कर दिया कि कोविड-19 में काम नहीं हो रहा लिहाजा लाइट नहीं लग सकती। इसके बाद जब सैलरी की बात आई तब प्रधान की ओर सेे आपत्ति जताई गई कि जब कोविड-19 में काम ही नहीं हो रहा है तब सैलरी किस बात की जारी की जाए, जबकि इस संबंध में लाइट इंस्पेक्टर ने अपना चार्ज और रिजाइन भी दे दिया।
इस बात को लेकर बाद में सेक्रेटरी अरुण नांदल की ओर से कहा गया इन कर्मचारियों से कोविड-19 से जुड़े अन्य काम भी लिए गए हैं लिहाजा इनकी सैलरी जारी की जाए। अब कुल मिलाकर मामला तो 2 कर्मचारियों की सैलरी को लेकर है इनमें से चार की सैलरी नगर पालिका के सेक्रेटरी की वजह से रुकी हुई है सेक्रेटरी का कहना है कि सैलरी जारी होगी तो एक बार में सभी 6 कर्मचारियों की जारी होगी। नपा प्रधान और सेक्रेटरी किसी तनातनी के चलते हुए कर्मचारी लेबर कोर्ट में चले गए हैं।
इस बात की कोई सूचना नहीं है कि अनुबंधित कर्मचारी लेबर कोर्ट में गए हैं हालांकि यह मामला 6 की बजाय 2 कर्मचारियों की सैलरी को लेकर है। इस विवाद का भी जल्द समाधान निकाल कर सुलझाने की कोशिश की जाएगी। जिन कर्मचारियों की सैलरी रोकी गई थी उनमें एक लाइट इंस्पेक्टर है जिसने खुद लिख कर दिया है कोविड-19 में काम नहीं हुआ और दूसरा कंप्यूटर ऑपरेटर है जिसकी नियुक्ति मना करने के बाद भी की गई। फिर भी अगर सेक्रेटरी का यह दावा है कि इन कर्मचारियों ने कोविड-19 में काम किया है तो नियमों के आधार पर इनकी सैलरी निकाल कर मामले का निपटारा किया जाएगा।
उमेश नंदवानी, चेयरपर्सन प्रतिनिधि
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