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213 करोड़ के फर्जी बिल जारी कर जीएसटी में हेराफेरी करने वाली 25 फर्मों की होगी जांच

सेंट्रल जीएसटी आयुक्तालय के अधिकारियों ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में जींद, कुंडली, सोनीपत, सिरसा, रोहतक, राई, बहादुरगढ़ और हिसार में 213 करोड़ 25 लाख रुपए के फर्जी बिल जारी करने के खेल में शामिल 25 फर्मों को चिह्नित करते हुए राडार पर लिया है। रोहतक आयुक्तालय की टीम के अधिकारी अब इन फर्मों का जमीनी स्तर पर जांच प्रक्रिया में जुटे हुए हैं।

अधिकांश फर्म के सर्वे में कागजों पर ही कारोबार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने का प्रयास किया है, जो जीएसटी एक्ट का उल्लंघन है। उच्चाधिकारी ने कारोबारियों से अपील की कि फर्जी बिल का संदेह होने पर एंटी एवेजन ब्रांच में आकर बिलों का वेरिफेकेशन करा लें। सेंट्रल जीएसटी आयुक्तालय रोहतक के उच्चाधिकारी ने बताया कि फर्जी बिल दिखाकर सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करना अपराध की श्रेणी में आता है।

जीएसटी चोरी पकड़े जाने पर 24 फीसदी तक भरना पड़ सकता है ब्याज

सीए व जीएसटी सलाहकार संजय थारेजा ने बताया कि जीएसटी विभाग यदि किसी फर्म संचालक को जीएसटी चोरी के केस में पकड़ लेता है तो उस संबंधित कारोबारी को टैक्स की राशि 24 फीसदी ब्याज और पेनाल्टी 15 फीसदी से 100 फीसदी तक भरनी पड़ सकती है। विभाग की ओर से उस कारोबारी का बैंक अकाउंट और आईटीसी फ्रीज किया जा सकता है। इसलिए कारोबारियों को समय पर रिटर्न भरने को प्राथमिकता देनी चाहिए।

इन जिलों में सामने आया फर्जीवाड़ा

जींद में एक फर्म ने चार करोड़ 42 लाख, कुंडली की एक फर्म ने नौ करोड़ 30 लाख, सोनीपत की एक फर्म ने 4 करोड़ 80 लाख, सोनीपत की एक फर्म ने 21 करोड़ 83 लाख, सोनीपत की एक और फर्म ने 17 करोड़ दो लाख, सिरसा की एक फर्म ने दो करोड़ 83 लाख, सिरसा के कालांवाली में संचालित फर्म ने तीन करोड़ 29 लाख, रोहतक की एक फर्म ने दो करोड़ 14 लाख, राई की एक फर्म ने 24 करोड़ 42 लाख, सिरसा की एक फर्म ने 84 लाख 34 हजार, बहादुरगढ़ की एक फर्म ने सात करोड़ 68 लाख, सिरसा की एक और फर्म ने 15 करोड़ 28 लाख और दूसरी फर्म ने एक करोड़ 23 लाख और एक दूसरी फर्म के नाम पर दो करोड़ 14 लाख, रोहतक की एक फर्म ने एक करोड़ 30 लाख, बहादुरगढ़ की एक फर्म ने 24 करोड़ पांच लाख, सोनीपत की एक फर्म ने सात करोड़ 87 लाख और हिसार की एक फर्म ने 2 करोड़ सात लाख रुपए के फेक बिल जारी किए हैं, जबकि छह फर्मों के संचालक ऐसे हैं जिन्होंने 59 करोड़ 69 लाख रुपए के फर्जी बिल जारी कर दिए। इनमें से कई फर्म पते पर नहीं मिली।



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फाइल फोटो।


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