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जब 4 केस थे तब स्वास्थ्य विभाग ने प्रपाेजल सरकार को भेजा था, अब साढ़े 3 हजार केस हो गए नहीं बनी लैब

जिले में काेराेना बेहद भयानक रूप ले चुका है। एक तरफ राेजाना 80 से ज्यादा केस आ रहे हैं ताे वहीं लगातार माैताें का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। एक्टिव केस में प्रदेश में पहले नंबर पर पहुंच गया है। जिले में काेराेना के जब 4 केस थे, तब स्वास्थ्य विभाग ने प्रपाेजल बनाकर सरकार को भेजा दिया था। अब साढ़े 3 हजार केस हो गए। इसके बावजूद लैब खोलने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। यही कारण है कि लैब के लिए कराेड़ाें की मशीनें तो मिल गईं, लेकिन अब स्टाफ नहीं मिल रहा। जिस कारण से लैब शुरू नहीं हो रही।

ये सिर्फ इस लैब के लिए ही नहीं सिविल अस्पताल में खुलने वाले आईसीयू व ब्लड बैंक के लिए भी सरकार से काेई मैनपावर नहीं मिली है। काेराेना जांच की इस लैब काे एक शिफ्ट में एक डाॅक्टर, एक लैब टेक्नीशियन, एक रिसर्च साइंटिस्ट, एक असिस्टेंट साइंटिस्ट, एक डाटा ऑपरेटर, एक स्वीपर, दाे क्लास-4 कर्मचारी की जरूरत है। इस तरह से दो शिफ्ट के लिए 16 स्टाफ चाहिए। लैब के लिए जिलावासी 6 माह से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार धीरे-धीरे करके एक-एक सामान दे रही है। या यूं कहे कि सरकारी सिस्टम की पाेल भी खाेल रहा है।

जानिए... लैब के लिए कब क्या हुआ

  • जिले में काेराेना के जब 4 केस थे, तब स्वास्थ्य विभाग ने प्रपाेजल बनाकर सरकार को भेजा दिया था।
  • जून में सरकार ने लैब के लिए रिकवायमेंट मांगी।
  • इस माह में विभाग ने बनने वाली जगह में लैब, उसका नक्शा सहित अन्य जानकारी मांगी।
  • इसके बाद जुलाई में भास्कर ने लैब के लिए कैंपेन चलाया ताे सरकार ने 20 जुलाई काे लैब काे मंजूरी दी
  • स्वास्थ्य विभाग काे लैब की मंजूरी का पत्र मिलने में 15 दिन लग गए। 4 अगस्त काे इन्हें मंजूरी पत्र मिला।
  • 7 अगस्त काे पहली मशीन आरएनए मशीन, बायाे मेडिकल सेफ्टी कैबीनेट मिला।
  • 8 काे मशीन का डेमाे हुआ, 9 काे लैब बनाने का काम शुरू ।
  • 21 अगस्त काे आरटीपीसीआर मशीन मिली, तब वह मशीन खाेली भी नहीं गई

स्टाफ के लिए प्राेसेस शुरू किया है : सीएमओ

सीएमओ डाॅ. संतलाल वर्मा ने बताया कि लैब के लिए कुछ सामान अभी भी पेंडिंग है। ताे वहीं लैब के लिए स्टाफ लेने के लिए प्राेसेस शुरू कर चुके हैं। अगले सप्ताह हमें स्टाफ मिल सकता है। स्टाफ मिलने और लैब का पूरा सामान आते ही इसे शुरू करवा दिया जाएगा। हमारी प्राथमिकता भी यहीं है कि लैब जल्द से जल्द शुरू हाे जाए।



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