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कोरोना काल में आयुर्वेदिक दवाओं की मांग बढ़ी, 4 माह में जिले के लोग पी गए 2 लाख काढ़ा पाउच, 80 हजार खाई गिलोय की गोली

कोरोनाकाल में कोरोना संक्रमण से बचाव व उपचार के लिए लोगों का एलोपैथी दवाओं की बजाय आयुर्वेदिक दवाओं पर ज्यादा भरोसा बढ़ा है। आयुष विभाग में आए काढ़ा पाउच की लगातार डिमांड बढ़ रही है। जून से लेकर अब तक जिले में 2 लाख काढ़ा पाउच को उबालकर लाेग पी चुके हैं। इसी तरह से गुडुची घनवटी (गिलोय की गोली) की भी खपत जो पहले नाममात्र की होती थी अब काफी बढ़ चुकी है। 80 हजार गिलोय गोली को लोग अब तक आयुष विभाग से ले जा चुके हैं।

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए आयुष विभाग ने इम्युनिटी बूस्टर के तौर पर विभिन्न जड़ी बूटियों से तैयार काढ़ा पाउच तैयार कर जून माह में प्रदेश भर के जिलों में भेजा था। जिस समय काढ़ा पाउच की सप्लाई भेजी गई थी। उस दौरान भीषण गर्मी थी। लेकिन लोगों ने इसकी परवाह न करते हुए कोरोना संक्रमण से बचने के लिए आयुष विभाग से खूब काढ़ा पाउच लेकर गए। इसी तरह से गिलोय गोली भी लोगों द्वारा खूब ली गई।

शुरुआत में घर-घर जाकर बांटे गए थे काढ़ा पाउच : जून में जब पहली बार आयुष विभाग का काढ़ा आया तो अधिकारियों व कर्मचारियों ने घर-घर जाकर, दफ्तरों में काढ़ा पाउच लोगों को बांटे।

अब बदले मौसम में और बढ़ी डिमांड : ज्यों-ज्यों ठंड में इजाफा हो रहा है और लोग खांसी, जुकाम, बुखार की चपेट में आ रहे हें। लोगों की आयुष विभाग के काढ़ा और गिलोय गोली की डिमांड काफी बढ़ गई है। रोजाना सिविल अस्पताल में खुली आयुष विभाग की डिस्पेंसरी से 50 से 60 मरीज काढ़ा व गिलोय गोली लेने आ रहे हैं।

इन दिनों जिले में काढ़ा व गिलोय गोली की काफी डिमांड बढ़ी हुई है। काढ़ा इम्युनिटी बूस्टर है और कोरोना संक्रमण के साथ-साथ अन्य बीमारियों से लड़ने की शरीर में ताकत बढ़ाता है। अब रोजाना काफी संख्या में लोग इन्हें लेने के लिए आ रहे हैं। काढ़ा व गिलोय गोली का शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। -डाॅ. रितेश, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी जींद।



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