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25 दिन से टूटी पड़ी है पेयजल सप्लाई लाइन शिकायत के बाद भी समस्या जस की तस है

क्षेत्र के गांव आजमाबाद मोखुता में पिछले 25 दिनों से जन स्वास्थ्य अनियंत्रित विभाग की पेयजल सप्लाई लाइन दो जगह से टूटी हुई है। इस कारण पानी आम रास्ते में बह रहा है और ग्रामीणों को पेयजल से वंचित रहना पड़ रहा है। इस संदर्भ में ग्रामीण जन स्वास्थ्य विभाग व बीडीपीओ निजामपुर को भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया है।

ग्रामीण भूप सिंह, सतीश कुमार पंच, लीलाराम, रामविलास मस्ताना आदि ने बताया कि 15-20 घरों में नाबार्ड परियोजना के तहत पेयजल सप्लाई के लिए लाइन डली हुई है। पिछले 25 दिनों से यह पाइप लाइन दो जगह से टूटी हुई है। इसकी शिकायत बीडीपीओ व जनस्वास्थ्य विभाग काे शिकायत दे चुके हैं लेकिन अभी तक इसकी मरम्मत नहीं होने के कारण पेयजल के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस टूटी पेयजल लाइन को जल्द से जल्द ठीक करवाया जाए ताकि लोगों को पीने का पानी मिल सके।

रेलवे ओवरब्रिज पर स्ट्रीट लाइट कई दिनों से बंद, वाहन चालक परेशान

नारनौल-दादरी रोड पर बने रेलवे ओवरब्रिज पर लगी स्ट्रीट लाइट काफी दिनों से बंद पड़ी हुई है। जिससे कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। ओवरब्रिज से शाम के 6 बजे के बाद वाहन चालकों के लिए यहां से निकलना किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है, क्योंकि स्ट्रीट लाइट खराब हाेने से अंधेरा छाया रहता है। जिससे वाहन चालकों को वाहन चलाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

रेलवे ओवरब्रिज पर लगी स्ट्रीट लाइट शो पीस बनी

फ्लाइओवर को रोशन करने के लिए लगी स्ट्रीट लाइट शोपीस बनकर रह गई हैं। जो कई दिनों से जल ही नहीं रही है। आसपास के लोगों का कहना है कि अगर स्ट्रीट लाइट जल्द रोशन नहीं होगी तो असामाजिक तत्व अंधेरे का फायदा उठाकर किसी भी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। उन्होंने नपा प्रशासन से लाइट को जल्द से जल्द ठीक करवाने की मांग की है।



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Drinking water supply line is broken for 25 days even after complaint, the problem remains the same


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पड़ोसी राज्यों से पहले वीआईपी ट्रीटमेंट फिर शुरू; विधायकों की गाड़ियों पर लगेगी झंडी

लाल बत्ती हटने के बाद वीआईपी कल्चर से बाहर हुए विधायकों की गाड़ी की अब दूर से पहचान हो सकेगी। जल्द मंत्रियों की तरह अब इन गाड़ियों पर भी झंडी लगेगी। अभी गाड़ी में कौन बैठा है, इसकी जानकारी विधायक की ओर से न दिए जाने तक न तो किसी कर्मचारी-अधिकारी को होती है और न ही आम आदमी को। इसलिए अब एमएलए लिखी झंडी गाड़ी पर लगेगी तो माननीयों को कुछ वीआईपी ट्रीटमेंट शुरुआत में ही मिलने लग जाएगा। इन झंडियों का डिजाइन तैयार हो चुका है। इसे स्पीकर ने मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि मॉनसून सत्र से पहले विधायकों की गाड़ियों पर ये झंडियां लग जाएंगी। विधायकों को हालांकि अभी विधानसभा से एमएलए लिखा स्टीकर जारी किया है, जो गाड़ियों के शीशे पर लगा है। पुलिस कर्मचारी हो या अन्य कोई, इस पर जल्दी नजर नहीं जाती। इसलिए कई उन्हें पार्किंग से लेकर रास्ते तक में रोक लिया जाता है। इससे कई बार विधायकों व पुलिस की बहस होने की खबरें भी आती रहती हैं। विधायकों ने पहचान के लिए झंडी की मांग थी। इसके अलावा गाड़ी की मांग भी की जाती रही है, जिसके लिए सरकार इनकार कर चुकी है। पुलिस अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों आगे...