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संगठनों ने किया सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन

सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा श्रम कानूनों में किए गए मजदूर-कर्मचारी विरोधी सुधारों के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जन संघर्ष मंच हरियाणा (घटक मासा), मनरेगा मजदूर यूनियन व निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन ने समर्थन किया है। जन संघर्ष मंच हरियाणा ने सहयोगी यूनियनों के साथी नया बस स्टैंड कुरुक्षेत्र पर प्रदर्शन किया। जन संघर्ष मंच हरियाणा की जिला उपप्रधान ऊषा कुमारी ने कहा कि मोदी व खट्टर सरकार मजदूर, कर्मचारी व किसान विरोधी है।

मोदी सरकार ने 44 श्रम कानूनों को पूंजीपतियों के हितों में 4 श्रम कानूनों में समेट कर मजदूरों के हितों पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा कि मंच हरियाणा पुलिस द्वारा किसानों के आंदोलन के लगातार दमन, किसान नेताओं की गिरफ्तारी, वॉटर कैनन के इस्तेमाल का कड़ा प्रतिवाद है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार कॉर्पोरेट्स के हाथों में सब कुछ बेचने में लगी है। मोदी सरकार अडानी-अम्बानी के मुनाफों को बढ़ाने के लिए हर तरह के मजदूर, कर्मचारी, किसान विरोधी कानून पास करने में लगी है, लेकिन देश का मेहनतकश वर्ग सरकार के तमाम जनविरोधी कानूनों के खिलाफ लम्बी लड़ाई लड़ने को तैयार है।



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Organizations protest against government policies


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लाल बत्ती हटने के बाद वीआईपी कल्चर से बाहर हुए विधायकों की गाड़ी की अब दूर से पहचान हो सकेगी। जल्द मंत्रियों की तरह अब इन गाड़ियों पर भी झंडी लगेगी। अभी गाड़ी में कौन बैठा है, इसकी जानकारी विधायक की ओर से न दिए जाने तक न तो किसी कर्मचारी-अधिकारी को होती है और न ही आम आदमी को। इसलिए अब एमएलए लिखी झंडी गाड़ी पर लगेगी तो माननीयों को कुछ वीआईपी ट्रीटमेंट शुरुआत में ही मिलने लग जाएगा। इन झंडियों का डिजाइन तैयार हो चुका है। इसे स्पीकर ने मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि मॉनसून सत्र से पहले विधायकों की गाड़ियों पर ये झंडियां लग जाएंगी। विधायकों को हालांकि अभी विधानसभा से एमएलए लिखा स्टीकर जारी किया है, जो गाड़ियों के शीशे पर लगा है। पुलिस कर्मचारी हो या अन्य कोई, इस पर जल्दी नजर नहीं जाती। इसलिए कई उन्हें पार्किंग से लेकर रास्ते तक में रोक लिया जाता है। इससे कई बार विधायकों व पुलिस की बहस होने की खबरें भी आती रहती हैं। विधायकों ने पहचान के लिए झंडी की मांग थी। इसके अलावा गाड़ी की मांग भी की जाती रही है, जिसके लिए सरकार इनकार कर चुकी है। पुलिस अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों आगे...