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किसानों ने बीरेंद्र सिंह से मुलाकात कर आंदोलन के समर्थन में आने को कहा

चौधरी छोटू राम विचार मंच के अध्यक्ष रज्जू अहलावत के निवास पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री चौधरी बीरेन्द्र सिंह पहुंचे। जहां मौजूद ग्रामीणों व किसानों ने बीरेंद्र सिंह से मुलाकात करते हुए नए कृषि कानूनों के विरोध में खुलकर दिल्ली बार्डर किसान आंदोलन के समर्थन में आने का अनुरोध किया। सभी ने किसानों के मसीहा चौधरी छोटूराम का हवाला देते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री से यह अनुरोध किया।

इस दौरान राजकुमार सांगवान द्वारा कृषि कानूनों पर लिखे विस्तृत लेख की प्रति सौंपी गई। जिसमें इन कानूनों के लागू होने से किसान, आढ़ती, श्रमिक, ट्रांसपोर्टर, कर्मचारी व आम नागरिकों को होने वाले नुकसान का विस्तार से जिक्र किया गया है। इन कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रावधान धीरे धीरे समाप्त हो जाएगा।

आवश्यक वस्तु अधिनियम में संसोधन के बाद आम आदमी के भोजन में शामिल गेहूं, चावल, दाल, तेल, आलू, प्याज आदि खाद्य सामग्री की जमाखोरी बढ़ेगी और ये सभी रोजमर्रा के लिए आवश्यक वस्तुएं इतनी महंगी हो जाएगी कि आम आदमी के वश में इन्हें खरीदना ही नहीं रह जाएगा। इस दौरान पूर्व सरपंच जोरावर सांगवान, सरपंच दलबीर गांधी, विरेंद्र किरोडी, नवीन, कृष्ण, लीला फौगाट, अधिवक्ता सुखवन्त सिंह, अशोक सिवाच, विरेंद्र श्योराण सहित विभिन्न सामाजिक व कर्मचारी संगठनों से जुड़े हुए पदाधिकारी व सदस्य भी उपस्थित थे।



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The farmers met Birendra Singh and asked him to come in support of the movement


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लाल बत्ती हटने के बाद वीआईपी कल्चर से बाहर हुए विधायकों की गाड़ी की अब दूर से पहचान हो सकेगी। जल्द मंत्रियों की तरह अब इन गाड़ियों पर भी झंडी लगेगी। अभी गाड़ी में कौन बैठा है, इसकी जानकारी विधायक की ओर से न दिए जाने तक न तो किसी कर्मचारी-अधिकारी को होती है और न ही आम आदमी को। इसलिए अब एमएलए लिखी झंडी गाड़ी पर लगेगी तो माननीयों को कुछ वीआईपी ट्रीटमेंट शुरुआत में ही मिलने लग जाएगा। इन झंडियों का डिजाइन तैयार हो चुका है। इसे स्पीकर ने मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि मॉनसून सत्र से पहले विधायकों की गाड़ियों पर ये झंडियां लग जाएंगी। विधायकों को हालांकि अभी विधानसभा से एमएलए लिखा स्टीकर जारी किया है, जो गाड़ियों के शीशे पर लगा है। पुलिस कर्मचारी हो या अन्य कोई, इस पर जल्दी नजर नहीं जाती। इसलिए कई उन्हें पार्किंग से लेकर रास्ते तक में रोक लिया जाता है। इससे कई बार विधायकों व पुलिस की बहस होने की खबरें भी आती रहती हैं। विधायकों ने पहचान के लिए झंडी की मांग थी। इसके अलावा गाड़ी की मांग भी की जाती रही है, जिसके लिए सरकार इनकार कर चुकी है। पुलिस अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों आगे...