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बाला वाला मंदिर परिसर में लगाया रक्तदान शिविर

शहर के मुख्यत बाला वाला मंदिर परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। संजय चाहार ने बताया कि रक्तदान शिविर की अध्यक्षता रक्तवीर परिवार संयोजक राजेश सोनी और सुमित प्रधान ने की। कार्यक्रम में पावन सानिध्य व आशीर्वाद बाबा सच्चा नाथ का रहा। कार्यक्रम में ऑल इंडिया व्यापार मंडल अध्यक्ष जय भगवान मस्ताना और ललित गर्ग ने अतिथि के रुप में शिरकत की।

कार्यक्रम में 90 रजिस्ट्रेशन हुए जिसमें से 75 लोगों ने रक्तदान किया। बाबा सच्चा नाथ और जयभगवान ने कहा कि रक्तदान महादान होता है। जिसे हमें दान करते रहना चाहिए। रक्त किसी मशीन या फैक्ट्री में नहीं बनता यह केवल मानव शरीर में मिलता है। इसलिए हमें रक्तदान करना चाहिए। बाबा सच्चानाथ ने बताया कि रक्तदान महादान है।

इससे हमारे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि कुछ जरूरतमंद लोगों की जान बचाने में हमारा योगदान जरूर हो जाता है। इससे बड़ा पुण्य का कार्य और कोई नहीं हो सकता। रक्तदान शिविर में सनशाइन फाउंडेशन का सहयोग रहा। कार्यक्रम में बिंटू सोनी, दया सिंह सैनी, भुनेश गोयल, रक्तवीर परिवार सदस्य शुभम शर्मा, संदीप, रविंद्र बंसल, अभिषेक फोगाट, सुरेंद्र आदि का विशेष सहयोग रहा।



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Blood donation camp organized in Bala Wala temple complex


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पड़ोसी राज्यों से पहले वीआईपी ट्रीटमेंट फिर शुरू; विधायकों की गाड़ियों पर लगेगी झंडी

लाल बत्ती हटने के बाद वीआईपी कल्चर से बाहर हुए विधायकों की गाड़ी की अब दूर से पहचान हो सकेगी। जल्द मंत्रियों की तरह अब इन गाड़ियों पर भी झंडी लगेगी। अभी गाड़ी में कौन बैठा है, इसकी जानकारी विधायक की ओर से न दिए जाने तक न तो किसी कर्मचारी-अधिकारी को होती है और न ही आम आदमी को। इसलिए अब एमएलए लिखी झंडी गाड़ी पर लगेगी तो माननीयों को कुछ वीआईपी ट्रीटमेंट शुरुआत में ही मिलने लग जाएगा। इन झंडियों का डिजाइन तैयार हो चुका है। इसे स्पीकर ने मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि मॉनसून सत्र से पहले विधायकों की गाड़ियों पर ये झंडियां लग जाएंगी। विधायकों को हालांकि अभी विधानसभा से एमएलए लिखा स्टीकर जारी किया है, जो गाड़ियों के शीशे पर लगा है। पुलिस कर्मचारी हो या अन्य कोई, इस पर जल्दी नजर नहीं जाती। इसलिए कई उन्हें पार्किंग से लेकर रास्ते तक में रोक लिया जाता है। इससे कई बार विधायकों व पुलिस की बहस होने की खबरें भी आती रहती हैं। विधायकों ने पहचान के लिए झंडी की मांग थी। इसके अलावा गाड़ी की मांग भी की जाती रही है, जिसके लिए सरकार इनकार कर चुकी है। पुलिस अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों आगे...