25 दिसंबर शुक्रवार को गीता जयंती एवं तुलसी दिवस के उपलक्ष्य में पंचनंद महिला मण्डल की महिलाओं द्वारा हनुमान मंदिर में तुलसी पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित सभी महिलाओं ने तुलसी को चुनरी ओढ़ाकर उनकी पूजा की तथा मंगल-गीत गाकर तुलसी दिवस को बड़ी धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर आशा पाहवा, अनिता अरोड़ा, रचना चुटानी, गीता चुटानी, संगीता मुंजाल, वीना वधवा, रेखा मदान, रेनू डावरा, वन्दना दुआ ने उपस्थित सभी महिलाओं को बताया कि एकादशी में तुलसी विवाह का खास महत्व होता है।
तुलसी विवाह करने से कन्या दान के बराबर फल प्राप्त होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता तुलसी ने भगवान विष्णु को नाराज होकर श्राप दे दिया था कि तुम काला पत्थर बन जाओगे। इसी श्राप की मुक्ति के लिए भगवान ने शालीग्राम पत्थर के रूप में अवतार लिया। शालीग्राम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और तुलसी को मां लक्ष्मी का अवतार माना जाता है।
एकादशी के दिन तुलसी विवाह किया जाता हैं। तुलसी विवाह करवाने वाले लोगों का दाम्पत्य जीवन प्रेम से भर जाता है। मां तुलसी की पूजा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु को तुलसी दल अत्यंत प्रिय है। उनकी पूजा व शुभ कार्यों में तुलसी दल चढ़ाया जाता है। अंत में तुलसी माता को प्रणाम कर प्रसाद वितरित किया गया तथा तुलसी दिवस की सबने एक दूसरे को बधाइयां दी।
तुलसी दिवस के समारोह पर लगाई सवामणी
पंचनद चौक स्थित गाेसेवा साहिबजादों की शहीदी, तुलसी दिवस एवं एकादशी के उपलक्ष्य में सामूहिक गोमाता की सवामणी लगा कर गोमाता का आशीर्वाद प्राप्त किया। लोगों ने पंडित लीला कृष्ण शर्मा की अध्यक्षता में गाेमाता की पूजा अर्चना की। आज की सवामणी में बीएन वर्मा, रामदयाल पाहवा, वासदेव आनन्द, नन्द लाल ठुकराल, चन्द्र प्रकाश चावला, श्याम अरोड़ा, अनिल कुकरेजा, महेश गुप्ता, गणेश गुप्ता, जय दयाल पैन्टर, विलायती खुराना आदि विशेष सहयोग रहा। डॉ. बीएन वर्मा ने कहा कि गाेमाता की सेवा से बढ़कर कोई दूसरी सेवा नहीं है। साहिबजादों की शहीदी, तुलसी दिवस एवं एकादशी के उपलक्ष्य में 24वीं सवामणी का आयोजन किया गया।
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