महान क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी शहीद उधम सिंह की जयंती पर शनिवार काे सीहमा में कार्यक्रम हुआ, जिसमें वक्ताओं ने उनके जीवन और आजादी के लिए दिए गए योगदान की ग्रामीणों को जानकारी दी।
अमरसिंह निम्होरिया ने कहा कि शहीद उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 पंजाब के संगरूर में सुनाम गांव में हुआ था। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की थी।
जब जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ तो उनका जीवन आजादी की लड़ाई की तरफ मुड़ गया। उन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के दोषी को मारने का मन बना लिया। जलियांवाला बाग हत्याकांड को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस दिन अंग्रेजों ने जनरल डायर के आदेश पर बड़ी बेरहमी से जलियांवाला बाग में फायरिंग शुरू कर दी थी, जिसमें कई हजारों हिंदुस्तानियों की जान चली गई थी। राहुल बोध ने बताया कि इस हत्याकांड से व्यथित उधमसिंह ने जनरल डायर को मारने का मन बना लिया था।
13 मार्च 1940 को लंदन में माइकल ओ डायर काे उन्होंने मौत के घाट उतारकर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। माइकल ओ डायर जलियांवाला बाग कांड के वक्त पंजाब प्रांत के गवर्नर थे। इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया जहां उनको फांसी की सजा सुनाई गई। कार्यक्रम में कैप्टन बनवारी लाल, हरिकृष्ण, अशोक दास, भीमसिंह, धर्मपाल, राजकुमार, दिनेश, बिमला, सुनीता, सुमन समेत अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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