गीता एक दर्पण है जो हमें स्वयं का और भगवान का सत्य परिचय करा मानव को दिव्य गुण व शक्तियों से संपन्न बना समाज को श्रेष्ठ बनाने का रास्ता दिखाती है। यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की कादमा शाखा में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव एवं तुलसी दिवस के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी वसुधा बहन ने व्यक्त किए। इस दौरान श्री कृष्ण की झांकी सजाई गई।
बहन वसुधा ने कहा की गीता में कहा गया है कि कर्म करो फल की चिंता मत करो अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण होना चाहिए। हम अगर अपने भारत देश को पुन विश्व गुरु बनाना चाहते हैं तो हमें अपने हर कर्म को नैतिकता के साथ करना होगा। जिसके परिणाम सकारात्मक व सफल होंगे। ब्रह्माकुमारी बहन ने कहा की गीता का ज्ञान एकमात्र ऐसा ज्ञान है जो किसी संत महात्मा ने नहीं बल्कि स्वयं भगवान ने सुनाया है। इसको सुनने से मन के मैल धूल जाते हैं। उन्होंने कहा की आत्मा अजर, अमर, अविनाशी है। प्रेम, आनंद, सुख, शांति, पवित्रता आदि आत्मा के वास्तविक गुण हैं।
आत्मा के इस ज्ञान को धारण करने से हम मृत्यु के भय से मुक्त हो सकते हैं। वसुधा बहन ने कहा कि हमें सत्य को स्वीकार करना है कि अकेले आए हैं अकेले जाना है इसलिए जो यह मनुष्य जीवन मिला है इसको काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार आदि विकारों के साथ बीड़ी, सिगरेट, शराब आदि व्यसनों से मुक्त कर नैतिक, आध्यात्मिक व दैवी गुणों से संपन्न बना अपने श्रेष्ठ कर्मों द्वारा समाज को एक नई दिशा देने का कार्य करें। तभी हमारा यह गीता महोत्सव मनाना सार्थक सिद्ध होगा। उन्होंने तुलसी के अनेक गुणों का वर्णन करते हुए कहा की तुलसी हमें पवित्रता का पाठ पढ़ाती है।
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