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अभिभावकों में बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर अभी भी बना डर

अभिभावकों में अपने बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर अभी भी डर बना हुआ है। इसलिए स्कूल खुलने के 4 दिन बाद भी स्कूलों में बच्चो की संख्या कम ही है। वहीं स्कूल संचालकों का कहना है कि 6 महीने से स्कूल बंद थे,अभी छात्रों की संख्या सामान्य होने में समय लगेगा। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या भी स्कूल में बढ़ जाएगी। शिक्षा विभाग ने 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को अपने विषय से जुड़े प्रश्नों को टीचर्स से पूछने के लिए स्कूल आने की अनुमति दी है। हरदयाल पब्लिक स्कूल की चेयरपर्सन अनुराधा यादव ने बताया कि अभी शुरुआत है जब अभिभावकों में भरोसा बढ़ेगा तो स्टूडेंट्स की संख्या भी बढ़ जाएगी।

गौरतलब है कि सरकार के आदेश पर 5 माह 29 दिन बाद सोमवार से सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूल खोल दिए गए। 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं क्लास के बच्चों को बुलाया गया था। स्कूलों में स्टूडेंट्स की उपस्थिति बहुत कम रही। स्कूल में प्रवेश करने से पहले सभी स्कूलों में विद्यार्थियों की थर्मल स्कैनिंग कर हाथ सेनिटाइज कराए जा रहे है।

इसके अलावा क्लास रूम में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा रहा है। लंबे अंतराल के बाद स्कूल पहुंचे स्टूडेंट्स के चेहरों पर उत्साह के साथ साथ डर भी है। अभी स्कूलों में केवल उन्हीं बच्चों को बुलाया जा रहा है जिन्हें किसी विषय के सवाल समझने में परेशानी आ रही है और उनके अभिभावक लिखित में अनुमति दे रहे है। स्टूडेंट्स बुलाने से पहले उनके अभिभावकों से मंजूरी ली जा रही है। बगैर अभिभावकों की अनुमति से किसी भी को नहीं बुलाया जा रहा।

कक्षाओं में साेशल डिस्टेंसिंग का कराया जा रहा पालन
बीईओ निर्मल शर्मा ने बताया कि सभी स्कूलों की ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में अभी नियमित कक्षाएं नहीं चलेंगी। बच्चों को स्कूल में बुलाने से पहले कोरोना सुरक्षा के सभी इंतजाम किए गए हैं। सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में सभी बच्चों की गेट के बाहर ही थर्मल स्कैनिंग और हाथ सेनिटाइज कराए जा रहे है। स्कूलों में मास्क लाना अनिवार्य है। इसके अलावा क्लास रूम में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा रहा है। क्लासरूम में एक सीट पर सिर्फ एक ही बच्चे के बैठने की व्यवस्था है। शिक्षा विभाग के मुताबिक अभी स्कूलों में नियमित कक्षाएं नहीं चलेंगी। 9, 10, 11 और 12वीं क्लास के बच्चों की सूची तैयार कर उन्हें मैसेज भेजकर स्कूल बुलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार के आदेश पर स्कूलों को खोलने का निर्णय के बाद सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को एसओपी का पालन करना अनिवार्य है। बगैर थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइज के किसी भी बच्चे को स्कूल के अंदर आने की अनुमति नहीं है।



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