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गेहूं 1975 रुपए, बाजरा पहुंचा 2150, दूसरे राज्यों से हरियाणा आने की आशंका बढ़ी

बाजरे की खेती झज्जर के किसानों के लिए कमाई के लिए बेहतर फसल के रूप में उभर कर आई है। पिछले कई दशकों पर नजर डाले तो मौजूदा सरकार ने बाजरे को प्रोत्साहन देकर इसकी कीमतों में लगातार इजाफा किया है। 5 दिन के बाद मंडी में आने वाली बाजरे की फसल का प्रति क्विंटल भाव गेहूं की फसल से अधिक रहेगा, जबकि दो दशक पहले इसका भाव गेहूं से एकदम आधे से भी कम होता था।

प्रदेश सरकार की ओर से बाजरे का इतना अधिक मूल्य घोषित कर दिया है। ऐसे में अब हरियाणा में दूसरे राज्यों से बाजरा पहुंचने की आशंका बन गई है। मंडी के जानकारों का कहना है कि बाजरे का मौजूदा भाव 2150 रुपए प्रति क्विंटल है। वहीं, गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपए घोषित किया गया है।

गेहूं की खेती के मुकाबले बाजरे की खेती में लागत मूल्य काफी कम है। बारिश के दिनों में होने वाली इस फसल में पानी की आपूर्ति बनाए रखने की अधिक आवश्यकता नहीं पड़ती है, जबकि गेहूं की फसल के लिए किसानों को कहीं अधिक मारामारी करनी पड़ती है। समय-समय पर पानी लगाने के साथ-साथ इसमें खाद के रूप में लागत मूल्य कहीं अधिक हो जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मौजूदा भाजपा सरकार ने जिस प्रकार से बाजरे की खरीद शुरू की है उससे किसानों में उत्साह है।

किसान सुरेश सिंह व सतबीर सिंह ने बताया कि इस फसल की तरफ किसानों की गंभीरता नहीं होती थी। खेत खाली ना रहे इसी बात को लेकर बाजरे की बिजाई का काम हो जाता था, लेकिन जिस प्रकार से पिछले कई वर्षों से इसके रेटों में इजाफा किया जा रहा है। इससे किसान ही नहीं बल्कि व्यापारियों की भी इसपर नजर है। जिले में बाजरे की खरीद सीजन के दौरान बाहर दूसरे प्रदेशों से बाजरा आने की संभावना बढ़ गई है। जानकारों का कहना है कि कुछ लोगों ने आसपास के गांव में इसका पहले से ही स्टॉक करना शुरू कर दिया।

ओपन मार्केट में बाजरे की कीमत 12 सौ से 14 सौ रुपए प्रति क्विंटल के बीच है, जबकि प्रदेश सरकार की ओर से जो बाजरा खरीदा जाएगा। उसकी कीमत 2150 रुपए है। दाम में भारी अंतर होने के कारण बाजरे के मामले में व्यापारीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, मौजूदा प्रदेश सरकार ने ऐलान किया कि खरीद सीजन के दौरान बाजरे का दाना दाना खरीदा जाएगा। दूसरे प्रदेशों का बाजरा हरियाणा की मंडियों में ना पहुंचे इसके लिए प्रशासन को विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं, लेकिन जिस प्रकार से कई आढ़ती रूपी व्यापारियों ने पहले से ही पहले बाजरे का स्टॉक ग्रामीण क्षेत्रों में कर लिया है।

पंजीकरण कराने वाले किसानों का ही बाजरा खरीदेंगे
प्रदेश सरकार की ओर से बाजरे की खरीद सुनिश्चित करने के साथ इसका बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिए जा रहे हैं। किसानों का रुझान बाजरे की तरफ बढ़ाएं। काफी किसान धान की खेती छोड़कर बाजरे उगाने पर आ गए हैं। बिक्री व्यवस्था सही तरीके से चले इसके लिए फसलों का पहले ही पंजीकरण हो चुका है। उन्हीं किसानों का बाजरा मंडियों में खरीदा जाएगा जिनका पंजीकरण हुआ है। यह व्यवस्था दूसरे प्रदेशों से आने वाले बाजरे को रोकने में भी कारगर साबित होगी।-इंद्र सिंह, डिप्टी डायरेक्टर कृषि विभाग।



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Wheat reached Rs 1975, millet 2150, there is a possibility of coming to Haryana from other states


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