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कोरोनाकाल में टाइम पर सेलरी न मिलने से लोन लेने वाले कर्मियों पर 3.50 करोड़ का जुर्माना, सिबिल भी खराब

टाइम पर सेलरी नहीं आने के कारण कोरोना काल में करीब 35 हजार लोन धारक कर्मचारियों पर 1 महीने में लगभग 3 करोड़ 50 लाख रुपए जुर्माना लगा है। इसमें सरकारी कर्मचारी, अधिकारी, प्राइवेट जॉब सहित अन्य बिजनेसमैन शामिल हैं, जिन्होंने होम, व्हीकल समेत अन्य लोन लिए हुए हैं। कोरोना काल के तीन महीने से इनकी किस्तें टाइम पर नहीं जा रही है और किस्तों के लिए दिए गए चेक बाउंस हो रहे हैं।

इन्होंने अतिरिक्त जुर्माना के औसतन एक हजार रुपए देकर लेट किस्त जमा करनी पड़ रही है। इस स्थिति में इनका सिबिल भी खराब हो रहा है। कोरोनाकाल में सरकार का भी बजट बिगड़ गया है, क्योंकि सरकारी कर्मचारी एवं अधिकारी की एक तारीख को आने वाली सेलरी अब 20 तारीख को आने लगी है। 3 महीने से व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कर्मचारियों का कहना है कि फाइनेंस कंपनियां किसी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है।

यदि दो किस्त पेंडिंग हो जाती है तो व्हीकल काे इंपाउंड कर लेते हैं। होम लोन न आने पर फाइनेंस का स्टाफ उसके घर तक पहुंच जाता है। बैंक के अधिकारियों का कहना है कि लोन धारक की सहमति से किस्तों का फिक्स टाइम तय किया जाता है। कुछ पुलिस कर्मचारियों ने नाम न बताते हुए कहा कि उन्होंने दो-तीन तरह के लोन ले रखे हैं। जिनकी किस्त वेतन आने पर भरते हैं, लेकिन कोरोना के कारण समय पर सेलर नहीं आने से उनको जुर्माने के साथ किस्त भरनी पड़ी है।

जिले में लोन धारकों की संख्या दो लाख
जिले में करीब दो लाख लोन धारक हैं। फाइनेंस कंपनियों के अनुसार लगभग केसों में किस्त की तारीख 5 से 7 है । जिनकी किस्त पेंडिंग हुई है, उनके तर्क आए हैं कि सेलरी लेट आ रही है। किस्त की तारीख बढ़ाई जाए। प्राइवेट जॉब करने वालों की नौकरी भी चली गई है। इनमें सबसे अधिक कार, बाइक और होम लोन की किस्तें टूटी हैं। करीब 35 हजार लोन धारकों की अगस्त में किस्तें टूटी हैं।



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