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ठोकर लगाके वो मुझे पत्थर बना गया, पर जिंदगी का फलसफा मुझको सिखा गया...

आओ गुनगुना लें गीत समूह की ओर से वॉट्सएप पर एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसके अध्यक्ष हरिद्वार के प्रसिद्ध छंद शिल्पी बृजेन्द्र हर्ष, मुख्य अतिथि पानीपत से हरगोबिंद झांब कमल व गुड़गांव से निवेदिता चक्रवर्ती, विशिष्ट अतिथि केसर शर्मा कमल पानीपत, रामचन्द्र आकाश दिल्ली और जयप्रकाश मिश्र गाजियाबाद, संयोजक भारतभूषण वर्मा करनाल और संचालक संजय जैन दिल्ली रहे।

समूह के संरक्षक राष्ट्रीय गीतकार डाॅ. जयसिंह आर्य ने सभी कवियों का स्वागत किया। जिले की कवियित्री आराधनासिंह अनु ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति के साथ कवि सम्मेलन शुरू किया। इनके अलावा संताेष त्रिपाठी इंदाैर, धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफिर, शीला गहलावत सीरत चंड़ीगढ़, रजनी श्रीवास्तव, श्रीकृष्ण निर्मल दिल्ली, अनिल धीमान पोपट कामचोर, बृजेश सैनी शामली ने भी कविता सुनाई।

ये सुनाई कविता

  • बृजेन्द्र हर्ष : मैं जीवन पथ का राही हूं, पथ को ही जीवन कर लूंगा, संकल्पों के श्रम साधन से, सारे शूल सुमन कर लूंगा।
  • डाॅ. जयसिंह आर्य : अपने फन में तू पीडा जमाने की भर, फिर तू सबके जिगर में उतर जाएगा, जूझना मुश्किलों से जो सीखे यहां, वो ही दुनिया में जय अब संवर जाएगा।
  • हरगोबिंद झांब : कोई कुछ कहे जीवन को, वो निश्चित ही अनमोल है, जीवन मिले निश्चित सांसों का, नहिं बाद कोई तोल-मोल है।
  • निवेदिता चक्रवर्ती : पाहन सा नियति बना दे तुझको, मन मेरे तेरे नदी बहाते चलना, बारंबार समय गिराता रहे तुझे, तू दूसरों को बस उठाते चलना।
  • केसर शर्मा कमल : जीवन धरा बचाने निकला, मेरे साथ चलेगा कौन, जंगल पेड़ उगाने निकला, मेरे साथ चलेगा कौन।
  • रामचंद्र आकाश : हंसते हुए लमहों को बांध कर, गमों की गर्दों को छांट कर, खुले आकाश के नीचे जीना सीख ले।
  • जयप्रकाश मिश्र : मेरे मन के इस दीपक को, तुम आज जलाने आ जाना, जैसे भी संभव हो तुमको, उसी बहाने आ जाना।
  • संजय जैन : ठोकर लगाके वो मुझे पत्थर बना गया, पर जिंदगी का फलसफा मुझको सिखा गया।
  • भारतभूषण वर्मा : कुछ की मंजिल है दूर बड़ी, कुछ की मंजिल है, कुछ जीवन है रस की लहरें, कुछ में अवसाद भरे गहरे”
  • आराधनासिंह : कैसे-कैसे रंग दिखाती है जिंदगी, जीने के हमको ढंग सिखाती है जिंदगी,
  • प्रीतमसिंह: वाे जीवन क्या जिस जीवन में, आगे बढ़ने का जुनून न हो, वो रक्तशिरा मैं क्या कह दूं, जिस नस में बहता खून न हो।


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