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‘कपटी अपने मकड़जाल में स्वयं ही फंस जाता है’

पीयूष मुनि ने श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर से अपने दैनिक संदेश में कहा कि छल-कपट करने वाले लोग अपने पारिवारिक जीवन में भी छल-कपट करके गृह जीवन की एकता को भंग कर लेते हैं, क्योंकि कपट आपसी प्रेम के लिए कैंची का काम करता है। सामाजिक दृष्टि से ऊंची भूमिका पर पहुंचने के लिए लोग अनेक हथकंडे अपनाते हैं, प्रपंच रचते हैं, लेकिन फिर भी वे जनमानस का विश्वास प्राप्त नहीं कर पाते।

कपटी अपने मकड़जाल में स्वयं ही फंस जाता है। माया परलोक भी बिगाड़ती है और इस लोक को भी खराब करती है। छल-कपट करने वाला अपने पापों की आलोचना नहीं करता तथा जो सच्चे मन से अपने पापों के लिए क्षमायाचना करता है वही धर्म का आराधक होता है। धोबी गंदे वस्त्रों को पत्थर पर पछाड़ता है। इसी प्रकार कपटी की दुर्दशा होती है। मन के पवित्र व्यक्ति को कोई भय नहीं होता। कपटी को भय सताता है कि कहीं उसकी पोल न खुल जाए। वास्तविकता पर पड़ा पर्दा उठ जाने के बाद व्यक्ति का सही चित्र लोगों के सामने आ जाता है।

दुर्जन के मीठे शब्दों पर विश्वास नहीं करना चाहिए
क्रोधी, लोभी तथा अहंकारी का सुधार हो सकता है परंतु कपटी का सुधरना बड़ा मुश्किल होता है। कपटी की वाणी तथा व्यवहार पर कोई विश्वास नहीं करता क्योंकि उसकी असलियत जानना आसान नहीं होता। दुर्जन के मीठे शब्दों पर विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसमें शहद के साथ जहर भी मिला होता है।



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