जैसलमेर से कैंटर में लाए जा रहे थे 6 ऊंट, पुलिस ने तस्करों को ही दे दी सुपुर्ददारी, पीएफए पहुंची कोर्ट
राजस्थान से ऊंटों को लाने और रोहतक में पशु तस्करी का केस दर्ज होने का मामला पुलिस को उल्टा पड़ गया है। पुलिस पर आरोप है कि उसने पशु तस्करी में पकड़ी गाड़ी से बरामद हुए 6 ऊंटों को नियमों के खिलाफ तस्करों को ही कच्ची सुपुर्ददारी पर दे दिया, जबकि नियमों के हिसाब से इन ऊंटों को एफआईआर दर्ज होने और केस का कोर्ट से फैसला आने तक सरकारी संरक्षण में रखा जाना था। पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं कि जिस तस्करी केस में पुलिस ने ऊंटों को 30 अक्टूबर को पकड़ा, उन्हें खरीदने का इकरारनामा 9 नवंबर को बनाया गया है। रोहतक पुलिस के खिलाफ जिला अदालत में पिपुल फाॅर एनिमल की टीम ने केस दर्ज कराया है। 27 नवंबर को जेएमआईसी कोर्ट में इस केस की सुनवाई है।
गौरतलब है कि रोहतक के आईएमटी पुलिस थाना में गोरक्षक दल हरियाणा ने गोतस्करी के अंदेशे से शिकायत दी कि एक कैंटर में कुछ व्यक्ति ऊंटों को तस्करी के लिए यूपी ले जा रहे हैं। पुलिस ने सोनीपत रोड पर 6 ऊंटों से भरा कैंटर पकड़ लिया। गाड़ी में तीन व्यक्ति सवार थे। इनमें चालक यशवीर निवासी सोनीपत, राज जगताप और कर्ण भीमा मालवी निवासी जिला बड़वानी मध्यप्रदेश शामिल हैं। तीनों कोई कोई कागजात या परमिट पेश नहीं कर सके। पुलिस ने धारा 11 पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के तहत केस दर्ज कर दिया गया। तस्कर 3 नवंबर को ऊंटों की कच्ची सुपुर्ददारी करा ले गए। पीएफए के पदाधिकारी सूरज सिंह राठौड़ कोर्ट में पहुंच गए हैं।
आईएमटी थाना के जांच अधिकारी विकास का कहना है कि 6 ऊंटों की कच्ची सुपुर्ददारी करवाकर ऊंट उन्हें सौंप दिए थे। अब मामला कोर्ट में चला गया। कोर्ट से पक्की सुपुर्ददारी मिलेगी। ऊंचों के ठहराने का प्रबंध न होने के कारण पुलिस के पास कच्ची सुपुर्ददारी की पावर होती है।
वकील बोले- फैसले तक सुपरदारी का प्रावधान नहीं
वहीं, एडवोकेट संजीव कुमार बड़क का कहना है कि इस तरह के केस में सुपुर्ददारी का प्रावधान नहीं है। जब तक कोर्ट में केस चलता है और फैसला नहीं आ जाता। तब तक ऊंटों को किसी गोशाला, एनजीओ के पास रखा जाना चाहिए था। ये स्टेट प्रॉपर्टी मानी जाती है, लेकिन तस्करी के आरोप में पकड़े गए आरोपियों को ऊंट सौंप देना हैरान करता है।
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