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नहर में फेंके गए 3 वर्ष के देव का अभी तक नहीं चला पता

डेढ़ माह बीत चुका है, लेकिन उस 3 वर्षीय बच्चे देव का अभी तक भी कोई पता नहीं चला है जिसे उसके ही पिता ने नहर में फेंक दिया था। अब इन हालात में परिजनों की उम्मीद भी टूटने लगी है। बता दें कि विगत वर्ष 23 नवंबर को गांव नलीपार वासी सुशील कुमार ने अपने तीन बच्चों को नहर में फेंक दिया था।

इनमें से 8 वर्षीय शिव व 5 वर्षीय जाह्नवी के शव बरामद हो गए थे, जबकि 3 वर्षीय देव भरसक प्रयासों के बाद भी अब तक नहीं मिल सका। उधर, दस दिन पूर्व संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए गांव नबीपुर वासी 25 वर्षीय युवक अरुण का भी अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। यह युवक कुंजपुरा में अपनी इलेक्ट्रिक वेल्डिंग की दुकान बंद करके रात के करीब 9 बजे पड़ाेसी दुकानदार को दुकान की चाबी दे कर गया था। बाद में उसकी मोटरसाइकिल सुभरी गांव के निकट आवर्धन नहर पर खड़ी मिली थी।

जिस पर प्रथम दृष्टया उसके नहर में डूबने की आशंका व्यक्त की जा रही थी। इस मामले में पुलिस अन्य संदिग्ध पहलुओं पर भी जांच कर रही है। इस संबंध में थाना सदर प्रभारी इंस्पेक्टर बलजीत सिंह का कहना है कि पुलिस की टीमें लापता युवक की तलाश में जुटी हुई हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है कि युवक नहर में डूबा या उसके लापता होने की अन्य कोई वजह रही है। युवक के पास जो मोबाइल फोन था। वह लगातार स्विच ऑफ आ रहा है।



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लाल बत्ती हटने के बाद वीआईपी कल्चर से बाहर हुए विधायकों की गाड़ी की अब दूर से पहचान हो सकेगी। जल्द मंत्रियों की तरह अब इन गाड़ियों पर भी झंडी लगेगी। अभी गाड़ी में कौन बैठा है, इसकी जानकारी विधायक की ओर से न दिए जाने तक न तो किसी कर्मचारी-अधिकारी को होती है और न ही आम आदमी को। इसलिए अब एमएलए लिखी झंडी गाड़ी पर लगेगी तो माननीयों को कुछ वीआईपी ट्रीटमेंट शुरुआत में ही मिलने लग जाएगा। इन झंडियों का डिजाइन तैयार हो चुका है। इसे स्पीकर ने मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि मॉनसून सत्र से पहले विधायकों की गाड़ियों पर ये झंडियां लग जाएंगी। विधायकों को हालांकि अभी विधानसभा से एमएलए लिखा स्टीकर जारी किया है, जो गाड़ियों के शीशे पर लगा है। पुलिस कर्मचारी हो या अन्य कोई, इस पर जल्दी नजर नहीं जाती। इसलिए कई उन्हें पार्किंग से लेकर रास्ते तक में रोक लिया जाता है। इससे कई बार विधायकों व पुलिस की बहस होने की खबरें भी आती रहती हैं। विधायकों ने पहचान के लिए झंडी की मांग थी। इसके अलावा गाड़ी की मांग भी की जाती रही है, जिसके लिए सरकार इनकार कर चुकी है। पुलिस अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों आगे...