Skip to main content

ऑनलाइन पोर्टेबिलिटी शुरू होने से जिले में 34 हजार 431 टोकन धारकों को राहत

डिस्ट्रेश राशन टोकन के नोडल अधिकारी नरेंद्र सरदाना ने बताया कि ऑनलाइन राशन वितरण प्रणाली आरम्भ होने से पोर्टेबिलिटी भी आरम्भ हो गई है जोकि कोरोना महामारी के कारण कुछ समय के लिए बंद कर दी गई थी।

अब लाभार्थियों की सुविधा और राशन वितरण प्रणाली को पूर्ण पारदर्शी बनाने के लिए के ऑनलाइन व पोर्टेबिलिटी प्रणाली को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने फिर से लागू कर दिया है। पोर्टेबिलिटी से डीआरटी टोकन धारक अब अपने नजदीकी किसी भी डिपो धारक से राशन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि डीआरटी टोकन पर डिपो धारक की जानकारी अंकित है।सिरसा जिला में 34 हजार 431 हजार से अधिक परिवारों के डीआरटी टोकन के प्रिंट आउट लोकल कमेटी को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने कई दिन पहले ही उपलब्ध करवा दिए हैं।

इसके अतिरिक्त खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के द्वारा डीआरटी टोकन धारकों को राशन प्रति व्यक्ति पांच किलो गेहूं और एक किलोग्राम दाल प्रति परिवार वितरित करनी आरम्भ भी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्र में नप व नपा के माध्यम से तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित बीडीपीओ की देखरेख में बीएलओ द्वारा लाभार्थियों को राशन टोकन वितरित किए जा रहे है।

डीआरटी टोकन के लिए लाभार्थियों का चयन लोकल कमेटी द्वारा किए सर्वे के आधार पर बनाई गई सूचि के तहत खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने लाभार्थियों को नियमानुसार निरीक्षकों की देखरेख में राशन वितरण आरम्भ कर दिया है। राशन वितरण के समय लाभार्थियों से सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क लगाने का पालन करने की अपील भी की गई है। मई माह में बीपीएल को प्रति यूनिट दस किलोग्राम गेहूं, दो लीटर सरसों का तेल, एक किलोग्राम दाल प्रति परिवार और एक किलोग्राम नमक व एक किलो चीनी दिया जा रहा है। वहीं एएवाई/गुलाबी कार्ड धारकों को पहले चरण में इस माह 35 किलोग्राम गेहूं दी जा रही है और इसी माह दूसरे चरण में प्रति यूनिट पांच किलो गेहूं, 2 लीटर सरसों का तेल, एक किलो दाल, एक किलो चीनी व एक किलो नमक निशुल्क दी जा रही है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2X4J6oI

Popular posts from this blog

पड़ोसी राज्यों से पहले वीआईपी ट्रीटमेंट फिर शुरू; विधायकों की गाड़ियों पर लगेगी झंडी

लाल बत्ती हटने के बाद वीआईपी कल्चर से बाहर हुए विधायकों की गाड़ी की अब दूर से पहचान हो सकेगी। जल्द मंत्रियों की तरह अब इन गाड़ियों पर भी झंडी लगेगी। अभी गाड़ी में कौन बैठा है, इसकी जानकारी विधायक की ओर से न दिए जाने तक न तो किसी कर्मचारी-अधिकारी को होती है और न ही आम आदमी को। इसलिए अब एमएलए लिखी झंडी गाड़ी पर लगेगी तो माननीयों को कुछ वीआईपी ट्रीटमेंट शुरुआत में ही मिलने लग जाएगा। इन झंडियों का डिजाइन तैयार हो चुका है। इसे स्पीकर ने मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि मॉनसून सत्र से पहले विधायकों की गाड़ियों पर ये झंडियां लग जाएंगी। विधायकों को हालांकि अभी विधानसभा से एमएलए लिखा स्टीकर जारी किया है, जो गाड़ियों के शीशे पर लगा है। पुलिस कर्मचारी हो या अन्य कोई, इस पर जल्दी नजर नहीं जाती। इसलिए कई उन्हें पार्किंग से लेकर रास्ते तक में रोक लिया जाता है। इससे कई बार विधायकों व पुलिस की बहस होने की खबरें भी आती रहती हैं। विधायकों ने पहचान के लिए झंडी की मांग थी। इसके अलावा गाड़ी की मांग भी की जाती रही है, जिसके लिए सरकार इनकार कर चुकी है। पुलिस अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों आगे...